Monday, September 1, 2014

भिलाई में मेगा ब्लड डोनेशन कैम्प 6 से

0 1200 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य

0 देश भर में एकत्र करेंगे सवा लाख यूनिट

भिलाई नगर। रक्तदान सही मायमों में जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्त का दान कई लोगों की जान बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा होता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं।
देश भर में रक्त दान हेतु कई संस्थाएं हैं जो लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही हैं परंतु इनके प्रयास तभी सार्थक होंगे, जब हम स्वयं रक्तदान के लिए आगे आएंगे और अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इस हेतु आगे आने के लिए प्रेरित करेंगे। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की दुर्ग-भिलाई इकाई द्वारा 6 सितम्बर को भिलाई में मेगा ब्लड डोनेट कैंप का आयोजन किया जा रहा है। श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस जुनवानी भिलाई तथा संतोष रूंगटा ग्रुप (आर-1) कोहका कुरुद रोड, भिलाई में होने वाले इस विशाल रक्तदान शिविर में 1200 यूनिट रक्त संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ब्लड डोनेशन कैंप चलेगा। इस दिन देशभर के तीन सौ शहरों में सात सौ से अधिक ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए जाएंगे। मानवीय सेवा के इस पुनीत कार्य को व्यापक स्तर पर करने के लिए अभा तेरापंथ युवक परिषद ने बीड़ा उठाया है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के ब्रांड अम्बेसेडर इस वर्ष विवेक ओबेराय हैं। क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर भी इस अभियान के ब्रांड अम्बेसेडर रह चुके हैं।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि कई कारणं से रक्तदान इन दिनों जरूरी होता जा रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि रक्त देने से न केवल जरूरतमंद लोगों को जीवन दान मिलता है, बल्कि रक्तदाता को स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है। 18 से 60 वर्ष की आयु के स्वस्थ्य व्यक्ति जिनका वजन 45 किलो से ऊपर है वो 450 मिली लिटर रक्त दे सकते हैं। तीन महिने में कोई भी एक बार रक्तदान कर सकता है। पदाधिकारियों ने बताया कि गत 17 सितम्बर 2012 को देशभर से अभा तेरापंथ युवक परिषद द्वारा 96600 यूनिट ब्लड कलेक्ट किए गए। वहीं इस बार पूरे देश में एक लाख 25 हजार यूनिट रक्तदान का लक्ष्य रखा गया है। इस महति आयोजन के लिए सभी जनप्रतिनिदियों ने बधाई संदेश दिया है। साथ ही इस अभियान में सभी समाज, औद्योगिक संस्थाओं व सभी सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं के अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है। रक्तदान से संबंधित सभी  जानकारी के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन डेटा बैंक भी बनाया गया है, जिसमें ब्लड ग्रुप के नाम सहित सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध होगी। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 09268607080 पर संपर्क किया जा सकता है या ६६६.ुं३८स्रेुिि.ूङ्मे पर लाग इन कर सकते हैं।

Sunday, October 13, 2013

The Scientific Way to Mend a Broken Heart

Most of us have experienced heartbreak, and when you think about how it made you feel, it's very similar to physical pain and suffering. That's no mistake-our brains process physical pain and emotional pain in similar ways.
Physical pain and emotional pain are both handled by the anterior cingulate cortex, a portion of our brains responsible for a number of higher emotional and cognitive functions like decision making and empathy as well as regulating pain response in terms of blood pressure and heart rate. When you touch something hot or break up with your significant other, the same region of the brain lights up-albeit in context and scale with the significance of the pain you're experiencing. Of course, bandages and painkillers work on cuts and bruises, but how do you minimize emotional pain from a breakup or some other social falling out?
The key is to surround yourself with friends and family. It may be difficult, and you may already know you should, but a strong social support structure has been shown to help minimize drastic changes in cortisol and norepinephrine levels in the brain-both hormones associated with stress response. Essentially, there's a very scientific reason for why surrounding yourself with friends will help keep you sane and on the level, even through tough times.

Wednesday, August 28, 2013

हड्डी टूटती है पहले, गिरते बाद में हैं वृद्ध

अब जब भी कभी आपके परिवार के बुजुर्गा बाथरूम में गिर पड़ें तो उनपर झल्लाना मत। हो सकता है कि उनकी हड्डी पहले चटकी हो और इसकी वजह से वे गिर पड़े हों। आम तौर पर हमें ऐसा लगता है कि बार बार बाथरूम जाने या पानी के पास जाने से वे गिर कर घायल हो जाते हैं और पूरे परिवार की मुसीबत हो जाती है। यह कहना है चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ राजन तिवारी का। वे कहते हैं कि बुढ़ापे की मार से कमजोर हुई हड्डियों के जोड़ कभी भी टूट सकते हैं। आगे पढ़िए
भिलाई के स्मृित नगर में संधान एवं एसोसिएशन आॅफ न्यूरोसाइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वृद्धावस्था के जटिल रोगों के प्रति जागरूकता के शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि बुढ़ापे से बोन मटेरियल कम हो जाता है, हड्डियां भुरभुरी हो जाती हैं। कार्टिलेज भी कमजोर और शिथिल होने लगते हैं। ऐसे में जरा सा जोड़ पड़ने पर जांघ की हड्डी के सिर वाले भाग को संभालने वाले कोटर चटक सकते हैं। इससे बैलेंस बिगड़ जाता है और लोग गिर पड़ते हैं। बाद में वे चिकित्सक को बताते हैं कि कमर के पास कट से आवाज आई और वे गिर पड़े। इसके प्रति सावधान रहने की सलाह देते हुए वे कहते हैं कि बाथरूम को यथासंभव सूखा रखें, दीवारों पर सहारे के लिए हैंडल लगाएं तथा ऊंचे वेस्टर्न टाइप कमोड का इस्तेमाल करें तो इन चोटों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

Tuesday, August 27, 2013

कैसी हो बुढ़ापे की कुर्सी?

बुढ़ापे की लाठी के बारे में तो आप सबने सुना हुआ है किन्तु बुढ़ापे की कुर्सी कैसी होनी चाहिए इसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। या फिर पता है भी तो वे उसकी परवाह नहीं करते। चलिए हम यहां आपको बताते हैं कि बुढ़ापे की कुर्सी कैसी होनी चाहिए?
स्पोर्ट्स मेडिसिन तथा अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ अनुपम लाल बताते हैं कि बुढ़ापे में किसी भी स्थिति में आपके घुटने 90 अंश से कम कोण तक नहीं मुड़ने चाहिए। इससे आपको चोट लग सकती है। वे बताते हैं कि यदि आप नीचे बैठकर पूजा करते हैं तो बेहतर होगा कि भगवान को थोड़ा और ऊंचा आसन दें और फिर खुद भी किसी चौकी पर बैठकर पूजा करें। घुटनों को ज्यादा मुड़ने से बचाने के लिए वेस्टर्न कमोड का इस्तेमाल करें। ज्यादा धंसने वाले सोफों पर न बैठें। बुढ़ापे में बेहद हल्के फुल्के व्यायाम करने की सलाह देते हुए डॉ लाल बताते हैं कि यह शरीर की डीजनरेट्वि स्टेज है जहां अधिकांश तकलीफें शरीर के अंगों में हो रहे क्षरण (घिसावट) की वजह से होती हैं। यदि हम दर्द होने के बावजूद पेनकिलर लेकर काम करते रहते हैं तो इससे समस्या बढ़ सकती है। वे तो यहां तक कहते हैं कि यदि घुटनों में दर्द हो, चलने फिरने में कोई समस्या आ रही हो तो वाकिंग को भी विराम दे देना चाहिए। डॉ लाल स्मृति नगर आरोग्य निकेतन में संधान एवं एसोसिएशन आॅफ न्यूरोसाइंसेस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता शिविर को संबोधित कर रहे थे। आगामी अंकों में पढ़ें शिविर में उपस्थित अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने क्या क्या कहा...

Sunday, August 25, 2013

क्या आपकी गर्दन में दर्द है?

क्या आपकी गर्दन में दर्द हो रहा है? यदि हां तो उसे थोड़ा आराम दें। गर्दन का दर्द दूर करने के लिए उसे इधर उधर झटके मत दें। जोर लगाकर उसे इधर उधर न घुमाएं। यदि दर्द लगातार रहता है तो कम से कम एक सप्ताह के लिए 24 घंटे सर्वाइकल कालर लगाएं। यदि मांस पेशियों में तनाव की वजह से दर्द हुआ तो यह अपने आप ठीक हो जाएगा। तकलीफ इसके बाद भी रहती हो तो तत्काल अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें। यदि वजह कोई और हुई तो झटकों से नुकसान और बढ़ सकता है।
चंदूलाल चंद्राकर स्मृति चिकित्सालय के न्यूरो सर्जन डॉ राजन तिवारी ने यह सलाह खासकर बुजुर्गों को दी है। उन्होंने बताया कि मेरूदंड (स्पाइन) के प्रत्येक दो मनकों के बीच एक गद्दे जैसी संरचना होती है। इस गद्दे के बीच में एक थैली होती है जिसमें युवावस्था के दौरान 90 फीसद पानी होता है। यह मेरूदण्ड के मनकों के बीच शॉक अबसार्बर जैसे काम करता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है पानी की मात्रा कम होती जाती है। बुढ़ापे में यह 70 फीसदी या उससे भी कम हो जाती है। इससे शरीर का कद भी कम हो जाता है। दबाव या चोट की वजह से जब ये थैलियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो मेरूदण्ड के मनकों पर दबाव बढ़ता है और दर्द रहने लगता है। आम तौर पर गर्दन और कमर के मनकों के आसपास यह समस्या आती है।
गर्दन मेें यह समस्या आती है तो उसे सर्वाइकल स्पांडिलोसिस कहते हैं। आरंभिक अवस्था में इसे बिना किसी सर्जरी के पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। समस्या का जल्द समाधान नहीं करने पर मेरूदण्ड में से होकर सुरक्षित गुजरने वाली शिराएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और फिर उनका इलाज लगभग असंभव हो जाता है। 

स्मृति नगर के बुजुर्गों के बीच पहुंचे चिकित्सा विशेषज्ञ

संधान एवं एसोसिएशन आफ न्यूरोसाइंसेज की पहल      

भिलाई। आयु जनित रोगों के प्रति जन जागरूकता लाने  के उद्देश्य से  संधान संस्थान एवं एसोशिएशन आॅफ न्यूरो साइंसेस द्वारा आरोग्य निकेतन स्मृतिनगर में कालीबाड़ी कल्याण समिति के सहयोग से एक स्वास्थ्य परिचर्चा सम्पन्न हुई। दुर्ग-भिलाई में विषय विशेषज्ञों के व्याख्यानों-परिचर्चाओं की आरम्भ शृंखला  के अंतर्गत इस आठवीं  परिचर्चा  में 125 वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे।
जवाहरलाल नेहरु चिकित्सालय एवं अनुसन्धान केंद्र भिलाई के वरिष्ट उप निदेशक व अस्थि रोग विशेषज्ञ डा अनुपम लाल ने बढ़ती आयु के साथ शरीर की हड्डियों व नसों (मसल्स) में उत्पन्न होने वाले विकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। हड्डियों की कमजोरी (ओस्टोपोरोसिस) के कारणों को बतलाते हुए उन्होंने ऐसे रोगियों को अपनी हड्डियों को टूटने से बचाने के लिए सजकता से अपने दैनिक कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने नियमित योग-व्यायाम तथा केल्सियम व  विटामिन सी एवं इ युक्त संतुलित भोजन को अस्थि विकारों से यथा संभव बचने का मार्ग बतलाया। उन्होंने उन सरल व्यायामों का प्रदर्शन भी किया जिन के नियमित अभ्यास से घुटनों के दर्द से बचाव व राहत मिल सकती है।
चंदूलाल अस्पताल के न्यूरो सर्जन डा राजन तिवारी ने गर्दन के संधि विकार (सेरिब्रल स्पोंडोलायसिस) के कारणों, निदान, बचाव तथा उपचार को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आयु के साथ डिस्क में द्रव की कमी से कशेरूकाओं के परस्पर नजदीक आने से नसों पर दबाब के कारण स्पोंडोलायसिस की स्थिति व्यक्ति में विकसित होती है। उन्होंने बतलाया की शुरुआती चरण में इस विकार के निदान होने पर इसका शत प्रतिशत इलाज संभव है। इस विकार से बचने के लिए उन्होंने एक व्यायाम का प्रदर्शन भी किया।
जवाहरलाल नेहरु चिकित्सालय एवं अनुसन्धान केंद्र भिलाई के निदेशक डा शैलेन्द्र कुमार जैन ने प्रश्नोत्तर सत्र की अध्यक्षता करते हुए बुजुर्गों को बेहतर स्वाथ्य के लिए नियमित हल्के व्यायाम करने, संतुलित भोजन लेने व मानसिक सक्रियता हेतु रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रहने की सलाह दी।
परिचर्चा के प्रश्नोत्तर सत्र में जवाहरलाल नेहरु चिकित्सालय एवं अनुसन्धान केंद्र भिलाई के संयुक्त निदेशक व नेत्र रोग इकाई के प्रमुख डा आनंद वी देशपांडे ने मधुमेंह रोगियों को हर वर्ष अपनी आँखों की जांच करने की उन्होंने सलाह दी। प्रसिद्ध न्यूरो रोग विशेषज्ञ डा नचिकेत दीक्षित ने पलकों की नसों व मसल्स की कमजोरी होने वाली दिक्कतों को बतलाया। जाने-माने फिजिशियन डा टी के पाण्डे ने मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के खान-पान से जुड़ी भ्रांतियों को स्पष्ट किया। सेक्टर-9 चिकित्सालय के उदर रोग  विशेषज्ञ डा जीवन लाल ने पीलिया रोग के प्रकारों की चर्चा करते हुए इस रोग से बचने के उपाय व सावधानियां बतलाई।
आरम्भ में कालीबाड़ी कल्याण समिति के अध्यक्ष बी एम के बाजपेयी ने विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए ऐसी परिचर्चाओं को निरंतर जारी रखने का मत व्यक्त किया। संस्था के उपाध्यक्ष आर एन पाल, सचिव ए के रॉयचौधरी, एस के दास ने पुष्पहारों से  विशेषज्ञों का स्वागत किया। अध्यक्ष बी एम के बाजपेयी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। संधान संस्थान के सचिव प्रो डी एन शर्मा ने परिचर्चा का सञ्चालन किया तथा उपस्थित प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समाजसेवी अभय राम तिवारी, बी एस पी के पूर्व महाप्रवंधक के के सिंघल, डा पी के श्रीवास्तव, डा अंजना श्रीवास्तव, डा जी पी शर्मा, डा हरिनारायण दुबे, महेश चतुर्वेदी, घनश्याम देवांगन, डी पी दास, बिमान भट्टाचार्य सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Sunday, August 11, 2013

Narayana hospital ties up with UAE's healthcare provider

10 August. 2013. RAIPUR: In order to provide high-tech and state-of-the-art care to patients, ShreeNarayana Hospital, Raipur, has joined hands with UAE's healthcare provider, New Medical Centre (NMC) for a strategic partnership.
Announcing this on Saturday, founder and managing director of NMC, Dr BR Shetty, and managing director of Shree Narayana hospital, Raipur Dr Sunil Khemka, said that with this merger the hospital will expand services in various fields. They said the hospital will improve its existing facilities with the installation of state-of-the-art equipment including 1.5 Tesla MRI machine, 128 slice CT scan, lithotripsy machine and endoscopic ultrasounds.
Giving details about the expansion of hospital, Dr Khemka said, "We have plans to establish renal transplant, test tube, trauma centres and specialized units for burns, cosmetic and plastic surgery, paediatrics, neonatology, oncology and oncosurgery."
He said the present 45-bed ICU will be expanded to 75-bed with a special emergency command centre wherein a team of super specialists and intensivists will be available online with their expert advice and input for ICUs and hospitals situated in remote areas. Special attention shall be paid to the healthcare of mother and child.
A fully equipped mobile ICU/cardiac ambulance service shall also be available round-the-clock for trauma, accident and cardiac patients.