क्या आपकी गर्दन में दर्द हो रहा है? यदि हां तो उसे थोड़ा आराम दें। गर्दन का दर्द दूर करने के लिए उसे इधर उधर झटके मत दें। जोर लगाकर उसे इधर उधर न घुमाएं। यदि दर्द लगातार रहता है तो कम से कम एक सप्ताह के लिए 24 घंटे सर्वाइकल कालर लगाएं। यदि मांस पेशियों में तनाव की वजह से दर्द हुआ तो यह अपने आप ठीक हो जाएगा। तकलीफ इसके बाद भी रहती हो तो तत्काल अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें। यदि वजह कोई और हुई तो झटकों से नुकसान और बढ़ सकता है।
चंदूलाल चंद्राकर स्मृति चिकित्सालय के न्यूरो सर्जन डॉ राजन तिवारी ने यह सलाह खासकर बुजुर्गों को दी है। उन्होंने बताया कि मेरूदंड (स्पाइन) के प्रत्येक दो मनकों के बीच एक गद्दे जैसी संरचना होती है। इस गद्दे के बीच में एक थैली होती है जिसमें युवावस्था के दौरान 90 फीसद पानी होता है। यह मेरूदण्ड के मनकों के बीच शॉक अबसार्बर जैसे काम करता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है पानी की मात्रा कम होती जाती है। बुढ़ापे में यह 70 फीसदी या उससे भी कम हो जाती है। इससे शरीर का कद भी कम हो जाता है। दबाव या चोट की वजह से जब ये थैलियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो मेरूदण्ड के मनकों पर दबाव बढ़ता है और दर्द रहने लगता है। आम तौर पर गर्दन और कमर के मनकों के आसपास यह समस्या आती है।
गर्दन मेें यह समस्या आती है तो उसे सर्वाइकल स्पांडिलोसिस कहते हैं। आरंभिक अवस्था में इसे बिना किसी सर्जरी के पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। समस्या का जल्द समाधान नहीं करने पर मेरूदण्ड में से होकर सुरक्षित गुजरने वाली शिराएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और फिर उनका इलाज लगभग असंभव हो जाता है।
चंदूलाल चंद्राकर स्मृति चिकित्सालय के न्यूरो सर्जन डॉ राजन तिवारी ने यह सलाह खासकर बुजुर्गों को दी है। उन्होंने बताया कि मेरूदंड (स्पाइन) के प्रत्येक दो मनकों के बीच एक गद्दे जैसी संरचना होती है। इस गद्दे के बीच में एक थैली होती है जिसमें युवावस्था के दौरान 90 फीसद पानी होता है। यह मेरूदण्ड के मनकों के बीच शॉक अबसार्बर जैसे काम करता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है पानी की मात्रा कम होती जाती है। बुढ़ापे में यह 70 फीसदी या उससे भी कम हो जाती है। इससे शरीर का कद भी कम हो जाता है। दबाव या चोट की वजह से जब ये थैलियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो मेरूदण्ड के मनकों पर दबाव बढ़ता है और दर्द रहने लगता है। आम तौर पर गर्दन और कमर के मनकों के आसपास यह समस्या आती है।
गर्दन मेें यह समस्या आती है तो उसे सर्वाइकल स्पांडिलोसिस कहते हैं। आरंभिक अवस्था में इसे बिना किसी सर्जरी के पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। समस्या का जल्द समाधान नहीं करने पर मेरूदण्ड में से होकर सुरक्षित गुजरने वाली शिराएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और फिर उनका इलाज लगभग असंभव हो जाता है।
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